डर नाला-हा-ए-ज़ार से मेरे ख़ुदा को मान
आख़िर नवा-ए-मुर्ग़-ए-गिरफ़्तार भी नहीं
“For God's sake, heed my bitter, plaintive wail,This is no mere captive bird's mournful tale.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरे कड़वे विलापों से डरो और ईश्वर को मानो। आख़िरकार, यह केवल एक क़ैदी पक्षी की आवाज़ भी नहीं है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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