देखा 'असद' को ख़ल्वत-ओ-जल्वत में बार-हा
दीवाना गर नहीं है तो हुश्यार भी नहीं
“I've seen 'Asad' many times, in private and in company,If he's not mad, then not entirely sane is he.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैंने 'असद' को कई बार अकेले में और लोगों के बीच देखा है। अगर वह दीवाना नहीं है तो समझदार भी नहीं है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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