मरहम की जुस्तुजू में फिरा हूँ जो दूर दूर
तन से सिवा फ़िगार हैं इस ख़स्ता-तन के पाँव
“In quest of a balm, I have wandered far and wide,Oh, more bruised than the body are the feet of this broken frame.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मैं मरहम की तलाश में बहुत दूर-दूर तक भटका हूँ। इस दुखियारे शरीर के पाँव खुद शरीर से भी ज़्यादा ज़ख्मी हो गए हैं।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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