दी सादगी से जान पड़ुं कोहकन के पाँव
हैहात क्यूँ न टूट गए पीर-ज़न के पाँव
“With simple heart, I would yield my soul at Kohkan's feet;Alas! Why did not break the old woman's feet?”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
सरल हृदय से मैं कोहकन (फ़रहाद) के चरणों में अपनी जान दे देता। अफ़सोस! उस बुढ़िया के पाँव क्यों नहीं टूट गए?
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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