Sukhan AI
अहबाब चारासाज़ी-ए-वहशत न कर सके
ज़िंदाँ में भी ख़याल बयाबाँ-नवर्द था

My friends could not heal my wild despair,For even in prison, my thoughts roamed the desert air.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरे दोस्त मेरी जंगली उदासी या वहशत का इलाज नहीं कर सके, क्योंकि जेल में भी मेरा खयाल रेगिस्तान में भटक रहा था।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थIn app
अंग्रेज़ी अर्थIn app
हिंदी विस्तारIn app
अंग्रेज़ी विस्तारIn app
Comments

Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.

0

No comments yet.