क्यूँ मिरी ग़म-ख़्वार्गी का तुझ को आया था ख़याल
दुश्मनी अपनी थी मेरी दोस्त-दारी हाए हाए
“Why did you ever consider sympathizing with my plight?Your enmity was your own, but my friendship, alas, what a bitter blight!”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
तुम्हें मेरी पीड़ा में हमदर्दी का ख़याल क्यों आया था? तुम्हारी दुश्मनी तुम्हारी अपनी थी, लेकिन मेरी दोस्ती का, हाए हाए, क्या अंजाम हुआ।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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