पिन्हाँ था दाम सख़्त क़रीब आशियान के
उड़ने न पाए थे कि गिरफ़्तार हम हुए
“A hidden snare lay close beside the nest,We couldn't even fly, when we were put to the test.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
घोंसले के बहुत पास ही एक सख़्त जाल छिपा हुआ था। हम उड़ भी नहीं पाए थे कि पकड़े गए।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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