जिस क़दर रूह-ए-नबाती है जिगर तिश्ना-ए-नाज़
दे है तस्कीं ब-दम-ए-आब-ए-बक़ा मौज-ए-शराब
“As keenly as the vegetal soul, my heart for your grace does pine,Awave of wine brings solace, with immortality's breath divine.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मेरा हृदय आपकी अदा के लिए उतना ही प्यासा है जितना कि वनस्पति की आत्मा प्यासी होती है। शराब की एक लहर ऐसी तसल्ली देती है जैसे वह अमरता के जल की साँस हो।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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