वो दाद-ओ-दीद गराँ-माया शर्त है हमदम वगर्ना मेहर-ए-सुलेमान-ओ-जाम-ए-जम क्या है

“That priceless discernment and vision is the essential condition, my friend; otherwise, what worth has Solomon's seal or Jamshid's wondrous cup?”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

हे दोस्त, कद्रदानी और गहरी समझ की वह अनमोल दृष्टि ही सबसे ज़रूरी शर्त है; वरना सुलेमान की मुहर और जमशेद के चमत्कारी प्याले की भी कोई हैसियत नहीं है।

विस्तार

शायर बड़े अपनेपन से समझाते हैं कि इंसान की असली दौलत बाहरी ताक़त या चमत्कारिक चीज़ों में नहीं, बल्कि उसकी परखने और सराहने की नज़र में है। सुलेमान की जादुई अँगूठी और जमशेद का चमत्कारी प्याला—जो पूरी दुनिया की सल्तनत और राज़ दिखाते थे—बेकार हैं अगर आपके पास उन्हें समझने वाली गहरी नज़र और क़द्रदान दिल न हो। ज़िंदगी का सारा हुस्न और मायना चीज़ों में नहीं, बल्कि उन्हें महसूस करने वाले हमारे नज़रिये में बसता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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