दरेग़ ऐ ना-तवानी वर्ना हम ज़ब्त-आश्नायाँ ने
तिलिस्म-ए-रंग में बाँधा था अहद-ए-उस्तुवार अपना
“Alas for this weakness! Else we, who restraint knew well,Had bound our firmest vow in beauty's enchanting spell.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
अफ़सोस इस कमज़ोरी पर! वरना हम संयम जानने वालों ने रंग के जादू में अपना मज़बूत वादा बाँध लिया था।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
