ज़ि-बस आतिश ने फ़स्ल-ए-रंग में रंग-ए-दिगर पाया
चराग़-ए-गुल से ढूँढे है चमन में शम्अ' ख़ार अपना
“So much did fire attain a different hue in the season of bright flowers,The flower's lamp seeks its own thorn-candle in the garden's bowers.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
आग ने रंगों के मौसम में इतना अलग रंग पाया कि फूल का चिराग़ चमन में अपनी काँटों वाली शमा को ढूंढ रहा है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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