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अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा

No longer fit for love's humble plea, The heart I once prided, is no longer with me.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

मेरा दिल अब प्रेम की विनम्र प्रार्थना के योग्य नहीं रहा। जिस दिल पर मुझे कभी गर्व था, वह अब वैसा दिल नहीं रहा।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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