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जब कि मैं करता हूँ अपना शिकवा-ए-ज़ोफ़-ए-दिमाग़ सर करे है वो हदीस-ए-ज़ुल्फ़-ए-अंबर-बार-ए-दोस्त

When I lament my intellect's failing light,She tells of amber-fragrant tresses, dark and bright.

मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

जब मैं अपने दिमाग़ की कमज़ोरी की शिकायत करता हूँ, तो वह महबूब की अंबर-खुशबूदार ज़ुल्फ़ों की बात छेड़ देती है।

विस्तार

यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।

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