ये ग़ज़ल अपनी मुझे जी से पसंद आती है आप
है रदीफ़-ए-शेर में 'ग़ालिब' ज़ि-बस तकरार-ए-दोस्त
“This ghazal of mine, I love it from my very core, For in its radif, Ghalib, 'friend' is repeated, nothing more.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
मुझे अपनी यह ग़ज़ल अपने दिल से पसंद आती है, ग़ालिब, क्योंकि शेर की रदीफ़ में बस 'दोस्त' शब्द की ही पुनरावृत्ति है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
