है चश्म-ए-तर में हसरत-ए-दीदार से निहाँ
शौक़-ए-इनाँ गुसेख़्ता दरिया कहें जिसे
“Within my tearful eyes, by longing's veil concealed,A desire, like a wild river, has its reins unsealed.”
— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ
भीगी हुई आँखों में, दीदार की हसरत से छिपा हुआ, एक ऐसा शौक़ है जिसे लगाम टूटी हुई नदी कहा जा सकता है।
विस्तार
यह सुंदर शेर गहरी भावनाओं और दर्शन की खोज करता है। ग़ालिब ने बेहतरीन तरीके से प्रेम, लालसा और आध्यात्मिक खोज के विषयों को जोड़ा है, जो शताब्दियों से प्रेरणा देता है।
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