એક દમયંતી કન્યા સ્વયંવર વિષે રે; એ તો ફરી વળી બધે હૈ વરમાળ રે. બીજે ક્યાંઈ...

“The maiden Damayanti, in her Swayamvara, Went around with the garland for her groom. Elsewhere...”

— दलपतराम
अर्थ

कन्या दमयंती अपने स्वयंवर में वरमाला लिए घूम रही थी। वह अपने वर को चुनने के लिए चारों ओर देख रही थी।

विस्तार

यह दोहा राजकुमारी दमयंती के स्वयंवर की बात करता है, जहाँ उन्हें कई योग्य राजकुमारों और देवताओं में से अपना पति चुनना था। कल्पना कीजिए वह एक भव्य सभा में वरमाला लिए हुए चल रही हैं, उनकी आँखें प्रतिष्ठित अतिथियों के बीच अपने जीवनसाथी को ढूँढ रही हैं। उन्होंने ध्यानपूर्वक हर दावेदार पर विचार किया, एक-एक करके आगे बढ़ीं, अपने हाथ में वह माला लेकर जो उनके चुनाव का प्रतीक थी। यह छंद उनके नियत साथी को खोजने की इस महत्वपूर्ण यात्रा को खूबसूरती से दर्शाता है, जिसमें उनकी सावधानीपूर्वक सोच उजागर होती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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