રંગરસ ગુલાબવહુને ઘુંઘટેરે, રંગરસ ધનપાળભાઇને દુપટ્ટેરે; જેવો રંગ રાખે ધનપાળભાઇરે, એવો રંગ રાખજો બેચર વેવાઇ છે.

“The vibrant hue on Gulab Vahu's veil,The joyful shade on Dhanpal Bhai's shawl;The color Dhanpal Bhai maintains with grace,May Bechar Vevai keep in his own space.”

— दलपतराम
अर्थ

गुलाब बहू के घूंघट पर और धनपाल भाई के दुपट्टे पर रंगीन शोभा है। धनपाल भाई जैसा रंग (रौनक या शोभा) बनाए रखते हैं, बेचर वेवाई भी वैसा ही रंग बनाए रखें।

विस्तार

यह दोहा खुशी और उत्सव के माहौल को खूबसूरती से दर्शाता है। यह एक जीवंत तस्वीर पेश करता है, जिसकी शुरुआत गुलाब-बहू के रंगीन घूंघट और धनपाल-भाई की जीवंत दुपट्टे से होती है। इसका सार खुशी को गले लगाना और उसे बाहर से दिखाना है, ठीक वैसे ही जैसे वे चमकीले कपड़े पहनते हैं। फिर यह पंक्तियाँ playful तरीके से बेचर-वेवाई, जो एक सम्मानित रिश्तेदार हैं, से भी ऐसी ही प्रसन्नचित्त और उत्साही भावना बनाए रखने का आग्रह करती हैं। यह खुशी भरे समारोहों में समान उत्साह और जोश के साथ शामिल होने का एक गर्मजोशी भरा निमंत्रण है, जिससे अवसर की कुल मस्ती बढ़ जाती है। यह सभी को खुशी के 'रंग' और 'स्वाद' को जीवित रखने के लिए प्रोत्साहित करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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