वही है प्रश्न: कौन किसका है?मैं भी अपना नहीं, पराया हूँ!
“That is the question: who belongs to whom?I am not even my own, I am a stranger!”
— अमृत घायल
अर्थ
यह मूलभूत प्रश्न है कि कौन किसका है? मैं तो स्वयं अपना भी नहीं हूँ, बल्कि मैं एक पराया हूँ।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ इश्क़ की बात नहीं करता, यह तो ज़िंदगी के सबसे बड़े सवाल को उठाता है। शायर पूछ रहे हैं कि असल में कौन किसका है? और फिर कहते हैं कि मैं खुद भी अपना नहीं, पराया हूँ। यह वो एहसास है जब इंसान अपनी पहचान खो देता है, जैसे वह इस दुनिया में कहीं भी जड़ें नहीं जमा पा रहा हो। बहुत गहरा और दर्द भरा तसव्वुर है यह।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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