शून्य कुल योग में हूँ फिर भी ‘घायल’, शून्य से तो मैं सवाया हूँ।

“Though in the total I am zero, 'Ghayal', Still, I am one-and-a-quarter more than zero.”

— अमृत घायल
अर्थ

कवि 'घायल' कहते हैं कि भले ही वे कुल योग में शून्य के बराबर हों, फिर भी वे शून्य से सवा गुना अधिक हैं।

विस्तार

यह शेर आत्म-मूल्य पर एक गहरा दार्शनिक विचार है। शायर कह रहे हैं कि भले ही आपको दुनिया के किसी भी बड़े योग में 'शून्य' जैसा महसूस कराया जाए, फिर भी आपका अस्तित्व सिर्फ शून्य से कहीं अधिक है। यह इंसान के अंदर की उस ताकत को दर्शाता है, जो बाहरी दिखावे या किसी के मानने से नहीं, बल्कि स्वयं के होने से आती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.

← Prev11 / 11