“Know this: he who has transcended the self, truly understands; To him, all speech is becoming.”
जानो कि जिसने स्वयं को त्याग दिया है, वही वास्तव में समझता है। ऐसे व्यक्ति को सभी वचन और बातें शोभनीय लगती हैं।
यह सुंदर दोहा हमें ज्ञान के बारे में एक गहरा सत्य सिखाता है। यह कहता है कि सच्ची समझ उन्हें मिलती है जिन्होंने अपने अहंकार और स्वार्थ को त्याग दिया है। जब आप अपने छोटे 'मैं' से ऊपर उठ जाते हैं, तो आप चीजों को स्पष्ट रूप से देखना शुरू करते हैं और एक गहरी सच्चाई से जुड़ते हैं। ऐसे व्यक्ति के लिए, उनके कहे गए हर शब्द और उनके हर कार्य में स्वाभाविक रूप से शालीनता, बुद्धिमत्ता और उपयुक्तता आ जाती है। उनकी उपस्थिति सद्भाव लाती है, और उनके वचन में सच्ची अंतर्दृष्टि होती है क्योंकि वे अब व्यक्तिगत इच्छाओं या आसक्तियों से clouded नहीं होते। यह आंतरिक शांति खोजने और उस शांति को अपने सभी कार्यों में प्रतिबिंबित करने के बारे में है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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