સૌને મન તે કરે કલ્યાણ અખા એને હરિ મળ્યાની હાણ.

“He whose mind performs welfare for all, Akha, for him, the meeting with Hari is no loss at all.”

— अखा भगत
अर्थ

जिसका मन सबका कल्याण करता है, अखा, उसे हरि-मिलन में कोई हानि नहीं होती।

विस्तार

कवि संत अखा इस दोहे में एक गहरा विचार प्रस्तुत करते हैं। वे कहते हैं कि अगर किसी का मन हमेशा सबका भला करने में लगा रहता है, तो उसे भगवान से मिलने का अवसर खोने का खतरा रहता है। इसका मतलब यह नहीं कि दूसरों की मदद करना गलत है। बल्कि, अखा सूक्ष्म रूप से समझाते हैं कि जब हमारा ध्यान लगातार बाहरी दुनिया के कार्यों पर केंद्रित रहता है, चाहे वे कितने भी नेक क्यों न हों, तो हम अपनी आंतरिक आध्यात्मिक यात्रा की उपेक्षा कर सकते हैं। अखा के अनुसार, सच्ची आध्यात्मिक अनुभूति अक्सर अंदर की ओर मुड़ने और बाहरी कर्मों से परे दिव्य को भीतर खोजने से आती है। यह हमें बाहरी सेवा और आंतरिक आध्यात्मिक कार्य के बीच संतुलन बनाने की याद दिलाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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